गुरुवार, 25 मार्च 2021

माहिया 19

 

 

क़िस्त 19

1

क्यों फ़िक़्र-ए-क़यामत1 हो,

हुस्न रहे ज़िन्दा,

और इश्क़ सलामत हो।

 

2

ऐसे तो नहीं थे तुम,

ढूँढ रहा हूँ मैं,

जाने न कहाँ हो ग़ुम।

 

3

जो तुम से मिला होता,

लुट कर भी मुझको,

तुम से न गिला2 होता।

 

4

उनको न पता शायद

याद में उनके हूँ

मैं ख़ुद से जुदा शायद

 

 5

आलिम है, ज्ञानी है

पूछ रहा फिर

क्या इश्क़ के मा’नी है ?

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