अनुभूतियाँ 180/67
717
मुझे ग़लत ही समझा सबने
कभी किसी ने दिया साथ क्या
तुमने भी गर समझा ऐसा
तो इसमे फिर नई बात क्या ।
718
साथ निभाने वाली बातें
मैं कब भूला, तुम ही भूली
याद दिला कर भी क्या होगा
तुम्हें नही जब करना पूरी ।
719
कौन तुम्हारे साथ खड़ा था
किसने बना रखी थी दूरी
उन्हे परखना, उन्हें समझना
तुमने समझा नही ज़रूरी