गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

अनुभूतियाँ 17

 

1
ठोकर लगी तो गिरना था ही
आँख खुलेगी ,दिल सँभलेगा
दुख का फिर क्या शोक मनाना
मौसम है ,मौसम बदलेगा
 
2
बादल बरसा कर जल अपना
मन हल्का निर्मल कर लेता
आँसू रुक रुक जाते अन्दर
मन बोझिल बोझिल कर देता
 3
एक सहारा चली गई तुम
जीने के और सहारे भी
तुम्हें देखना आजीवन बस
मिलते हैं कहाँ किनारे भी
4
आशाएँ ज़िन्दा रहती हैं
उम्मीद अभी कुछ बाक़ी है
तुम छोड़ गए हो जिस घर को
वह आज अभी तक खाली है


-आनन्द.पाठक-

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