शनिवार, 25 सितंबर 2021

ग़ज़ल 193

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ग़ज़ल 193


आप महफ़िल में जब भी आते हैं

साथ अपने अना  भी लाते  हैं ।


चाँद तारों की बात तुम जानो

बात धरती की हम सुनाते हैं


जब भी आता चुनाव का मौसम

ख़्वाब क्या क्या न वो दिखाते हैं


वक़्त सबका हिसाब करता है

लोग क्यों ये समझ न पाते हैं


बेसबब बात वो नहीं करते

बेगरज़ हाथ कब मिलाते हैं 


अब परिन्दे न लौट कर आते 

गाँव अपना जो छोड़ जाते हैं


इस जहाँ की यही रवायत है

लोग आते हैं ,लोग जाते हैं


तुम भी क्यों ग़मजदा हुए ’आनन’

लोग रिश्ते न जब निभाते हैं


-आनन्द पाठक-



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