शुक्रवार, 26 मार्च 2021

माहिया 34

 क़िस्त 34

:1:

पूछा तो कभी होता,

मेरे इस दिल से,

यह किस के लिए रोता?

 

:2:

सोने भी नहीं देतीं,

यादें अब तेरी

रोने भी नहीं देतीं।

 

:3:

क्यों मन से हारे हो?

जीते जी मर कर

अब किस के सहारे हो?

 

:4:

ग़ैरों की सुना करते,

मेरी भी सुनते

क्यूँ तुम से गिला करते।

 

5

वो शाम सुहानी है,

शामिल है जिस में,

 कुछ याद पुरानी है।

 

 

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