शुक्रवार, 26 मार्च 2021

माहिया 42

 क़िस्त 42

 

:1:

 दो चार क़दम चल कर,

 छोड़ न दोगे तुम,

 सपना बन कर, छल कर?

 

  :2:

 जब तुम ही नहीं हमदम,

 सांसे  भी कब तक

 देगी यह साथ, सनम !

 

 :3:

दुनिया की कहानी में,

शामिल है सुख-दुख,

मेरी भी कहानी में।

 

:4;

विपरीत हुई धारा,

और हवाओं ने

कश्ती को ललकारा।

 

5

कितनी भोली सूरत,

रब ने बनाई हो,

जैसे तेरी मूरत।

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