शुक्रवार, 26 मार्च 2021

माहिया 43

 क़िस्त 43

 

 :1:

हर साँस अमानत है,

जितनी भी हासिल,

तेरी ही इनायत है।

 

:2:

सब ज़ेर--नज़र उनकी,

कौन छुपा उन से?

उन को है ख़बर सबकी।

 

 :3:

कब मैने सोचा था.

टूट गया वो भी

जो तुम पे भरोसा था।

 

 :4:

इतना जो मिटाया है,

और मिटा देते

दम लब पर आया है।

 

5

आँखों में शरमाना,

कुछ तो है दिल में,

रह रह कर घबराना।

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