शुक्रवार, 26 मार्च 2021

माहिया 48

 क़िस्त-48

 

:1:

क्यों दुख से घबराए ?

धीरज रख मनवा,

मौसम है, बदल जाए।

 

 :2:

तलवारों पर भारी,

एक कलम मेरी,

और इसकी खुद्दारी।

 

 :3:

सुख-दुख आए जाए,

सुख ही कहाँ ठहरा,

जो दुख ही ठहर पाए।

 

 :4:

तेरी नीली आँखें,

ख़्वाबों को मेरे

देती रहती साँसें।

 

5

इक नन्हीं सी चिड़िया,

खेल रही जैसे

मेरे आँगन गुड़िया।

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