शुक्रवार, 26 मार्च 2021

माहिया 89

 क़िस्त 89

1

वो जख़्म अगर देता,
कौन सा जख़्म भला,
जो वक़्त न भर देता। 
 

2

आया है मेरा हमदम,

बात मेरी उस ने,

रख्खी तो कम से कम 

 

3

इतना ही काफी है,

कोई ख़यालों में, 

जीवन का साथी है।

 

4

दुनिया के मेले में, 

गाता रहता है,

क्या दिल ये अकेले में ?

 

5

आया है कोई मन में,

फूल खिले मेरे,

सुधियों के उपवन में। 

 

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