गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

अनुभूतियाँ 14

 
1
आने वाले कल को किसने
 देखा है या कब सोचा है
लेकिन सपने बुनते रहते
जान रहे हैं सब धोखा है
 
2
किसको फ़ुरसत सुने हमारी
सब के अपने अपने ग़म हैं
ऊपर ऊपर हँसते रहते 
भीतर भीतर आँखें नम है ।
 
3
लोगों के ग़म एक तरफ़ हैं
अपना ग़म लगता है बढ़ कर
और तुम्हारे हुस्न का जादू
बोल रहा है सर पर चढ़ कर
 
4
कितने थे मासूम तुम्हारे
प्रश्न कभीपूछा करती थी
प्यार मुहब्बत क्या होता है
जीवन क्या ?
सोचा करती थी


-आनन्द.पाठक-

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