गुरुवार, 1 अप्रैल 2021

अनुभूतियाँ 19

 
1
कोई चाहत बची न मन में
और न कुछ मन में दुविधा है
प्यार-मुहब्बत लगता है जैसे
नए ज़माने की सुविधा है
 
2

एक समय था वह भी जब तुम

मेरी ग़ज़ल हुआ करती थी

जीवन भर यह साथ रहेगा

बार बार तुम दम भरती थी


 3
लेती हो दरपन के आगे
खड़ी खड़ी तुम जबअँगड़ाई
दरपन तो शरमा जाता  है
और इधर तुम भी शरमाई


4
सोच रही फिर क्यों तुम मुझको
क्या थी बुराई ,क्या अच्छा  है
नेक था कि बदनाम था ’आनन’
इन बातों में क्या रख्खा  है !


-आनन्द.पाठक-

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