शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

अनुभूतियाँ 27

 
1
मौन किसी का समझा तूने
सपन तेरा साकार हुआ है
वह भी एक भरम था तेरा
अर्पण कब स्वीकार हुआ है
  
2
अलग  राह जब चलना ही था
साथ चले थे क्यों इतने दिन
मेरा क्या है ,मेरी छोड़ो
जीना होगा अब तो तुम बिन
 
3
तुम ने भी तो देखे होंगे
आँधी, तूफ़ाँ, बिजली, पानी
तोड़ सकी कब ये सब तुमको
जीने की जब तुमने ठानी
 
4
क्यों मेरे पूजन-अर्चन को
तुम ने एक दिखावा समझा
मेरी बातें झूठ लगीं क्यों ?
तुमने एक छलावा  समझा

-आनन्द.पाठक-
 

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