शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

अनुभूतियाँ 50

 1
क्या खोया है तुम ने अपना
ढूँढ रही हो साँझ -सकारे
जो कुछ था लौटा तो दिया है
बाक़ी क्या अब पास हमारे ?
 2
एक बची तसवीर तुम्हारी
अक्स हुई है दिल के ऊपर
वो तो नहीं लौटा पाऊँगा
एक बची बस वही धरोहर
 
3
शाम हुई सामान समेटॊ
सफ़र खतम होने वाला है
दिन भर के तुम थके हुए हो
सूरज अब ढलने वाला है
4
अपनो से तो ग़ैर ही अच्छे
दिल तो नही तोड़ा करते हैं
वक़्त ज़रूरत ख़्वाब दिखा कर
मुँह तो नहीं मोड़ा करते हैं

-आनन्द.पाठक-

 

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