शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

अनुभूतियाँ 56

1
आशा की बस एक किरन भी
काफी होता अन्धकार में
हिम्मत साथ चली आती है
बैठी थी जो इन्तज़ार में
2
कितना वक़्त लगा करता है
भूल किसी को जाना, प्यारे!
सुख-दुख में शामिल होता था
साथ साथ जो  साँझ-सकारे
 3
इसी हवा से बुझते दीपक
इसी हवा से फैले ख़ुशबू
प्यार की बातें करने वाले
नफ़रत वाली करें गुफ़्तगू
4
क़दम क़दम पर दुनिया वाले
अटकाते रहते हैं रोड़े
उस से तो तारे बेहतर हैं
रात अँधेरी साथ न छोड़े
-आनन्द.पाठक-

 

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