शुक्रवार, 20 अगस्त 2021

अनुभूतियाँ 84

 


क़िस्त 84


333

मन से उतर गया हो कोई

अब उनकी क्या बातें करना

सीखा कभी नहीं हो जिसने

वादों पर भी खरा उतरना


334

पास अगर आ कर बैठे तो

अपनी अपनी कह लें सुन लें

वक़्त मिला है पल-दो पल का

आज नए कुछ सपने बुन लें


335

नज़रों से गिर जाए कोई

दिल में पुन: उतरता कब है 

टूट भले ही जाता दिल हो

लेकिन भला बिखरता कब है 


336

साहिल का लहरों से मिलना

तुम ने क्यों कमजोरी समझा

लहरों को आलिंगन करना

तुम ने क्यों बरजोरी समझा


-आनन्द.पाठक-

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