मंगलवार, 31 अगस्त 2021

अनुभूतियाँ 96

 


क़िस्त 96


381

अन्तर्मन से अन्तर्मन का 

जब अटूट हो जाए बंधन

गौण उधर तब हो जाता है

रूप-राशि तन का आकर्षन


382

मैं न रहूँ जब  साथ तुम्हारे 

रुकना नहीं सफ़र में अपने

धीरज रख कर पूरी करना

हम दोनों के जो थे सपने


383

जीवन क्या ? संघर्ष कथा है 

दीप-शिखा की, तूफ़ानों से

दुनिया तुम को पहचानेगी

ज्योति-पुंज के अभियानों से


384

धीरे-धीरे आखिर हम-तुम

इतनी दूर चले ही आए

अब तुम कहती लौट मैं जाऊँ

नामुमकिन है क्या बतलाएँ

-आनन्द.पाठक-

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